Adhik Maas 2026: 17 मई से शुरू हो रहा है पुरुषोत्तम मास, 30 दिनों तक बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपा; जानें क्या करें और किन कार्यों से बचें
17 मई से अधिक मास की शुरुआत, जानें क्या करें और क्या न करें, विष्णु पूजा और दान से मिलेगा विशेष फल
Adhik Maas 2026: साल 2026 हिंदू पंचांग में विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस वर्ष अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) पड़ रहा है। अधिक मास 17 मई 2026, रविवार से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। यह अतिरिक्त महीना चंद्र और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाने के लिए हर तीसरे साल आता है। ज्येष्ठ मास को इस बार अधिक मास के रूप में मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में अधिक मास को भगवान विष्णु का विशेष मास माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा, जप, दान और व्रत का फल दस गुना अधिक मिलता है।
पुरुषोत्तम मास की तिथि और धार्मिक मान्यता
अधिक मास 17 मई 2026 को प्रारंभ होगा और 15 जून 2026 को समाप्त होगा। इस मास को मलमास भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य महीनों में किए गए पुण्य कार्यों की तुलना में अधिक मास में किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
यह मास भगवान विष्णु को समर्पित है। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण और विष्णु पूजा इस मास में विशेष फलदायी मानी जाती है। अधिक मास में कोई भी नया मांगलिक कार्य (शादी, गृह प्रवेश, मुंडन आदि) करना वर्जित होता है क्योंकि यह मास शुभ कार्यों के लिए नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना के लिए होता है।
पुण्य प्राप्ति के लिए जरूर करें ये काम
अधिक मास भक्ति और पुण्य कार्यों का महीना है। इसमें निम्नलिखित कार्य करने से विशेष लाभ मिलता है:
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दान-पुण्य: अन्न, वस्त्र, फल, घी, दूध और चावल का दान करें। गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत शुभ है।
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दीपदान: रोज शाम को मंदिर या घर में घी का दीपक जलाएं। विष्णु मंदिर में तुलसी के सामने दीपदान विशेष फलदायी है।
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मंत्र जाप और कथा: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और श्रीमद्भागवत या विष्णु पुराण की कथा सुनें।
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पवित्र स्नान: गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर नहाना भी श्रेष्ठ है।
वर्जित कार्य: मलमास में क्या न करें?
अधिक मास शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इसमें निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:
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कोई नया व्यापार या बड़ा प्रोजेक्ट शुरू न करें।
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शादी, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्य न करें।
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नया मकान या जमीन की खरीदारी और बिक्री को टाल दें।
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किसी भी प्रकार का नया निवेश या बड़ा लोन संबंधी काम न करें।
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नया व्रत शुरू न करें और पुराने व्रत का उद्यापन भी इस मास में न करें।
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मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें।
ज्योतिष और दोष निवारण का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में अधिक मास को दोष निवारण का महीना माना जाता है। जिनकी कुंडली में कोई दोष (मांगलिक दोष, कालसर्प दोष आदि) है, उन्हें इस मास में विष्णु आराधना से लाभ मिलता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अधिक मास में की गई साधना से पिछले जन्मों के पापों का भी नाश होता है। इस मास में तुलसी पूजन और विष्णु सहस्रनाम पाठ का विशेष महत्व है।
धर्मशास्त्रियों का विशेष विश्लेषण
वरिष्ठ ज्योतिषी और धर्मशास्त्री कहते हैं कि अधिक मास भक्ति का महीना है। एक प्रसिद्ध ज्योतिषी ने कहा, “इस मास में सांसारिक काम कम करके आध्यात्मिक कार्यों पर ध्यान दें। दान और जप से मन की शांति मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।” उन्होंने सलाह दी कि अधिक मास में रोज विष्णु मंत्र जाप करना चाहिए।
Adhik Maas 2026: भक्ति और शांति का पावन समय
अधिक मास 2026 (17 मई से 15 जून) हिंदू धर्म का एक पवित्र और विशेष महीना है। इस दौरान भक्ति, दान, जप और सत्कर्म करने से विशेष फल मिलता है। मांगलिक कार्यों से बचकर आध्यात्मिक साधना पर ध्यान केंद्रित करें। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होंगी और सुख-समृद्धि आएगी। अधिक मास में नियमित पूजा-पाठ और मंत्र जाप करें।
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