गणगौर पर निभाई जाती है अनोखी परंपरा, मध्य प्रदेश के देवास में पत्नियां पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं व्रत और ‘गुड़ तोड़ने’ की रस्म में लाठी से करती हैं पिटाई
देवास में गणगौर पर पत्नियां व्रत रखकर ‘गुड़ तोड़ने’ की रस्म में लाठी से पतियों को मारती हैं
Gangaur festival tradition: भारत एक ऐसा देश है जहां हर त्योहार अपने आप में एक अनूठी कहानी लेकर आता है। यहां की परंपराएं और रीति रिवाज न केवल आस्था से जुड़े होते हैं बल्कि उनके पीछे एक गहरी सामाजिक सोच भी छुपी होती है। ऐसा ही एक अद्भुत पर्व है गणगौर, जो इस बार 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व जहां एक तरफ पति पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के एक जिले में इस पर्व की एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। यहाँ गणगौर के दिन पत्नियां अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और उन्हें लाठी से पीटती भी हैं।
Gangaur festival tradition: क्या है गणगौर पर्व और क्यों है यह खास
गणगौर पर्व की शुरुआत होली के अगले दिन यानी चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से हो जाती है और यह 16 दिनों तक चलता है। लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को इस पर्व का सबसे खास दिन माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 21 मार्च 2026 शनिवार को पड़ रही है। गणगौर शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। गण यानी भगवान शिव और गौर यानी माता गौरी। इसीलिए यह पर्व शिव और पार्वती के अटूट प्रेम और वैवाहिक जीवन की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं और शिव गौरी की विधिपूर्वक पूजा करती हैं।
Gangaur festival tradition: गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष गणगौर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। सुबह की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7:27 से 9:26 बजे तक रहेगा। दोपहर में लाभ मुहूर्त 2:00 बजे से 3:31 बजे तक रहेगा। इसके बाद सर्वोत्तम अमृत मुहूर्त दोपहर 3:31 बजे से शाम 5:02 बजे तक का रहेगा। शाम को पूजा के लिए लाभ मुहूर्त 6:33 बजे से रात 8:02 बजे तक उपलब्ध रहेगा। पूजा करने वाली महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार इन शुभ समयों में पूजा संपन्न कर सकती हैं।
Gangaur festival tradition: मध्य प्रदेश के देवास की अनोखी परंपरा
गणगौर का पर्व राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के देवास जिले के बागली अनुभाग में रहने वाले आदिवासी समाज में इस पर्व की एक ऐसी अनोखी परंपरा है जो इसे बाकी सभी जगहों से बिल्कुल अलग बनाती है। यहां गणगौर के दिन पत्नियां जहां एक तरफ अपने पतियों की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं वहीं दूसरी तरफ उसी दिन वे अपने पतियों को इमली के पेड़ की लकड़ी से पीटती भी हैं। यह परंपरा देखने में जितनी अजीब लगती है उतनी ही गहरी आस्था और सामाजिक संदेश इसके पीछे छुपा हुआ है।
Gangaur festival tradition: गुड़ तोड़ने की रस्म और पिटाई की परंपरा
इस अनोखी परंपरा में एक विशेष खेल का आयोजन किया जाता है जिसे गुड़ तोड़ने की प्रथा कहते हैं। इस रस्म में एक ऊंची लकड़ी के सिरे पर नारियल या गुड़ की पोटली बांधी जाती है। इस पोटली को पतियों की टोली को प्राप्त करना होता है। लेकिन महिलाएं उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं। पोटली छीनने से रोकने के लिए महिलाएं इमली के पेड़ की लकड़ी लेकर पुरुषों पर प्रहार करती हैं। अपने बचाव के लिए पुरुष ढाल का इस्तेमाल करते हैं। यह रोचक खेल पूरे सात बार खेला जाता है। इस दौरान पुरुषों को चोट भी लगती है लेकिन वे इसे माता का आशीर्वाद मानकर हंसते हुए सहते हैं।
Gangaur festival tradition: परंपरा के पीछे की गहरी सोच
इस अनोखी परंपरा के पीछे जो मान्यता है वह बेहद दिलचस्प और विचार करने वाली है। स्थानीय समाज की मान्यता है कि पत्नी घर की लक्ष्मी होती है। साल भर पति घर में अपना हुकुम चलाता है, कभी गुस्सा करता है, कभी भला बुरा कहता है। इसीलिए साल में एक दिन पत्नियों का होता है जब वो पति को पीटकर पूरे साल की सारी भूलचूक माफ कर देती हैं। पत्नी के हाथ से लगी चोट को पति माता गौरी का आशीर्वाद मानते हैं। यह परंपरा यह भी संदेश देती है कि वैवाहिक जीवन में दोनों पक्षों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
Gangaur festival tradition: गणगौर पर्व का धार्मिक और सामाजिक महत्व
गणगौर का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह समाज में महिलाओं की भावनाओं और उनके स्थान को सम्मान देने का एक तरीका भी है। इस पर्व के जरिए महिलाएं न केवल अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं बल्कि परिवार और समाज में अपनी उपस्थिति और महत्व को भी स्थापित करती हैं। देवास जिले के बागली अनुभाग की यह परंपरा दर्शाती है कि हमारे देश की लोक संस्कृति कितनी विविध और गहरी है। हर क्षेत्र की अपनी एक अलग पहचान है और यही विविधता भारतीय संस्कृति को पूरी दुनिया में अनूठा बनाती है।
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