चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे पर बनेगा अनोखा एनिमल ओवरपास, नीचे से गुजरेंगी गाड़ियां और ऊपर से वन्यजीव
महिमांडलम रिजर्व फॉरेस्ट में 90 मीटर लंबा पुल, नीचे गाड़ियां-ऊपर वन्यजीव सुरक्षित आवाजाही
Chennai-Bengluru Expressway: भारत में बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार तेज होने के साथ-साथ अब पर्यावरण संरक्षण को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे पर एक विशेष वाइल्डलाइफ ओवरपास का निर्माण इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह ओवरपास महिमांडलम रिजर्व फॉरेस्ट के बीच बनाया जा रहा है, जहां सड़क के नीचे से वाहन गुजरेंगे और ऊपर से जंगली जानवर अपनी प्राकृतिक आवाजाही जारी रख सकेंगे। यह परियोजना भारत में इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
Chennai-Bengluru Expressway: महिमांडलम रिजर्व फॉरेस्ट का महत्व
तमिलनाडु के वेल्लोर और रानीपेट जिलों के बीच स्थित महिमांडलम रिजर्व फॉरेस्ट जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह वन क्षेत्र भारतीय गौर, तेंदुए, जंगली सूअर, चीतल, सांभर, हिरण और विभिन्न प्रकार की पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। इस जंगल से होकर गुजरने वाला एक्सप्रेसवे इन जानवरों के प्राकृतिक मार्ग को बाधित कर सकता था, जिससे न केवल वन्यजीवों की आवाजाही में रुकावट आती बल्कि मानव-पशु संघर्ष की स्थिति भी बनती।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगली जानवरों के लिए अपने आवास के विभिन्न हिस्सों में आवागमन बेहद जरूरी होता है। यह उनके भोजन की तलाश, प्रजनन और क्षेत्रीय व्यवहार का अभिन्न हिस्सा है। सड़कों के निर्माण से इनके प्राकृतिक गलियारे टूट जाते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
वाइल्डलाइफ ओवरपास की अवधारणा और डिजाइन
वाइल्डलाइफ ओवरपास या एनिमल ब्रिज एक विशेष संरचना होती है जो व्यस्त राजमार्गों के ऊपर बनाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करना है ताकि वे बिना किसी खतरे के सड़क पार कर सकें। यह अवधारणा पश्चिमी देशों में काफी सफल रही है और अब भारत में भी इसे अपनाया जा रहा है।
NHAI द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार, यह ओवरपास 90 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा होगा। इसकी ऊंचाई सड़क की सतह से लगभग 5.5 मीटर रखी गई है, जो बड़े वाहनों को आसानी से गुजरने की अनुमति देगी। संरचना का डिजाइन इस तरह किया गया है कि यह जानवरों को प्राकृतिक वातावरण का एहसास कराए।
पुल की सतह को मिट्टी और स्थानीय वनस्पति से ढका जाएगा, जिससे यह जंगल के फर्श जैसा दिखेगा। इससे जानवरों को किसी मानव निर्मित संरचना पर चलने का एहसास नहीं होगा और वे स्वाभाविक रूप से इसका उपयोग करेंगे। किनारों पर हरी-भरी झाड़ियां और पेड़ लगाए जाएंगे ताकि जानवर सुरक्षित महसूस करें।
Chennai-Bengluru Expressway: प्राकृतिक वातावरण का निर्माण
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि ओवरपास को पूरी तरह से प्राकृतिक रूप देने के लिए तमिलनाडु वन विभाग के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। पुल की सतह पर आर्टिफिशियल घास का मैदान विकसित किया जाएगा जो स्थानीय वनस्पति से मेल खाएगा। यह घास का क्षेत्र न केवल जानवरों को आकर्षित करेगा बल्कि प्राकृतिक छलावरण का काम भी करेगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ओवरपास के दोनों ओर घने पेड़ और झाड़ियां लगाई जाएंगी जो जानवरों को निजता और सुरक्षा का एहसास देंगी। इसके अलावा, पुल तक पहुंचने के लिए दोनों तरफ से धीरे-धीरे ऊपर उठने वाले प्राकृतिक रैंप बनाए जाएंगे, जिससे जानवरों को चढ़ाई में आसानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती महीनों में जानवरों को इस नई संरचना से परिचित होने में समय लग सकता है, लेकिन एक बार जब वे इसे सुरक्षित मानने लगेंगे, तो यह उनके लिए नियमित मार्ग बन जाएगा।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद
भारत में हर साल हजारों सड़क दुर्घटनाएं जंगली जानवरों के सड़क पार करने के दौरान होती हैं। इनमें न केवल जानवरों की मौत होती है बल्कि मानव जीवन भी खतरे में पड़ता है और वाहनों को भी नुकसान होता है। वन्यजीव संरक्षण संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, राजमार्गों पर वन्यजीवों से टकराव के कारण होने वाली दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
यह ओवरपास इस समस्या का एक प्रभावी समाधान है। जब जानवरों को सड़क पार करने के लिए एक सुरक्षित विकल्प मिलेगा, तो वे सीधे सड़क पर आने की बजाय इस पुल का उपयोग करेंगे। इससे टकराव की घटनाओं में महत्वपूर्ण कमी आने की उम्मीद है।
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी फायदेमंद है। अचानक सड़क पर आने वाले जंगली जानवर गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, खासकर रात के समय। ओवरपास से यह खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।
Chennai-Bengluru Expressway परियोजना
लगभग 258 किलोमीटर लंबा चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे भारत की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में से एक है। इस चार-लेन एक्सप्रेसवे की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2022 में रखी थी। यह एक्सप्रेसवे दोनों महानगरों के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगा और व्यापार तथा पर्यटन को बढ़ावा देगा।
परियोजना की कुल लागत लगभग 17,800 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें 27 प्रमुख पुल, 64 छोटे पुल और कई फ्लाईओवर शामिल हैं। एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद चेन्नई से बेंगलुरु की यात्रा का समय मौजूदा 5-6 घंटे से घटकर मात्र 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों से होकर गुजरेगा और कई छोटे शहरों और कस्बों को जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और स्वीकृतियां
किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी आवश्यक होती है। चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे के लिए भी व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन किया गया था। इसी प्रक्रिया के दौरान महिमांडलम रिजर्व फॉरेस्ट के पारिस्थितिकी महत्व को ध्यान में रखते हुए वन्यजीव ओवरपास की सिफारिश की गई।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वन विभाग ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Chennai-Bengluru Expressway: अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन
भारत इस परियोजना में अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अनुसरण कर रहा है। कनाडा, अमेरिका, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वन्यजीव ओवरपास बेहद सफल रहे हैं। इन देशों के अनुभवों का अध्ययन करके भारतीय संदर्भ में उपयुक्त डिजाइन तैयार किया गया है।
विशेषज्ञों की एक टीम ने विदेशी वन्यजीव गलियारों का दौरा किया और उनकी सफलता के कारकों का विश्लेषण किया। इस शोध के आधार पर महिमांडलम ओवरपास को स्थानीय जानवरों की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किया गया है।
भविष्य की योजनाएं और विस्तार
NHAI ने संकेत दिया है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो देश के अन्य राजमार्गों पर भी इसी तरह की संरचनाएं बनाई जाएंगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां राजमार्ग संरक्षित वन क्षेत्रों या राष्ट्रीय उद्यानों से होकर गुजरेट हैं।
पर्यावरण मंत्रालय भी राजमार्ग परियोजनाओं के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है, जिसमें पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीव गलियारों का प्रावधान अनिवार्य किया जा सकता है।
Chennai-Bengluru Expressway: स्थानीय समुदाय की भागीदारी
इस परियोजना में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। आसपास के गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि लोग वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझें। स्थानीय लोगों को यह बताया जा रहा है कि ओवरपास न केवल जानवरों के लिए बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी फायदेमंद है।
वन विभाग के साथ मिलकर मॉनिटरिंग सिस्टम भी स्थापित किया जाएगा। कैमरा ट्रैप और सेंसर लगाकर यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से जानवर इस ओवरपास का उपयोग कर रहे हैं और कितनी बार। यह डेटा भविष्य में इसी तरह की परियोजनाओं के लिए उपयोगी होगा।
यह परियोजना साबित करती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। आधुनिक इंजीनियरिंग और पारिस्थितिकी संवेदनशीलता के संयोजन से ऐसे समाधान संभव हैं जो सभी के लिए फायदेमंद हों।
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