नया वर्ल्ड ऑर्डर आकार ले रहा! AI, ड्रोन और हाईटेक मिलिट्री टेक्नोलॉजी तय करेगी अगली महाशक्ति की पहचान, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में विशेषज्ञ बोले AI, साइबर वॉर और टेक्नोलॉजी बदलेंगे वैश्विक शक्ति संतुलन

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AI global power: दुनिया एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। ईरान में जारी युद्ध ने पूरी दुनिया की भू-राजनीति को हिलाकर रख दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक जंग है या किसी बड़े बदलाव की शुरुआत? इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जियोपॉलिटिकल कंसल्टेंट एडेल नाज़ेरियन ने इस सवाल का जवाब देते हुए दुनिया को चौंका दिया।

AI global power: ईरान की जंग सिर्फ जंग नहीं

एडेल नाज़ेरियन के मुताबिक ईरान में चल रहे संघर्ष को केवल एक क्षेत्रीय युद्ध समझना बहुत बड़ी भूल होगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई दरअसल उस नए विश्व व्यवस्था की नींव रख रही है जो आने वाले दशकों तक दुनिया का भविष्य तय करेगी। जब भी किसी बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष ने जन्म लिया है, तब उसके पीछे सिर्फ जमीन या तेल की लड़ाई नहीं रही, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की होड़ भी रही है। आज भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में उठती आग की लपटें केवल वहीं तक सीमित नहीं रहेंगी। इसका असर एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पड़ेगा। हर देश अब यह समझने की कोशिश कर रहा है कि इस नई दुनिया में उसकी भूमिका क्या होगी।

AI global power: AI और टेक्नोलॉजी बनेगी असली ताकत

एडेल नाज़ेरियन ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सबसे अहम बात यह कही कि आने वाले समय में कोई देश तभी महाशक्ति कहलाएगा जब उसके पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक तकनीक का मजबूत आधार होगा। पहले की दुनिया में परमाणु बम या विशाल सेना किसी देश को ताकतवर बनाती थी, लेकिन अब खेल बदल चुका है। उन्होंने कहा कि आज का युद्ध सिर्फ बंदूकों और मिसाइलों से नहीं लड़ा जाता। साइबर हमले, ड्रोन तकनीक, AI आधारित निर्णय प्रणाली और सैटेलाइट इंटेलिजेंस अब युद्ध के असली हथियार बन चुके हैं। जो देश इन क्षेत्रों में आगे होगा, वही अगली सदी का नेतृत्व करेगा।

AI global power: मिलिट्री डॉमिनेंस का बदलता स्वरूप

एक्सपर्ट ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में यह भी समझाया कि मिलिट्री ताकत का मतलब अब सिर्फ सैनिकों की संख्या नहीं रहा। आज की सेना वही जीतती है जो तेज, स्मार्ट और तकनीकी रूप से सक्षम हो। ड्रोन स्वार्म्स, AI से चलने वाले फाइटर जेट और हाइपरसोनिक मिसाइलें युद्ध का चेहरा बदल रही हैं। नाज़ेरियन के अनुसार ईरान संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक युद्ध की सोच अब पुरानी पड़ रही है। जो देश तकनीक की इस दौड़ में पीछे रह गया, वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर कमजोर साबित होगा। यही कारण है कि दुनिया के हर बड़े देश ने अपनी रक्षा नीति में टेक्नोलॉजी को केंद्र में रखना शुरू कर दिया है।

AI global power: भारत की क्या होगी भूमिका

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में इस चर्चा के दौरान भारत का जिक्र भी बेहद अहम रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस नए वैश्विक समीकरण में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है। भारत के पास युवा आबादी, मजबूत आईटी सेक्टर और बढ़ती रक्षा क्षमताएं हैं। अगर भारत ने सही समय पर सही नीतियां अपनाईं तो वह इस नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी जगह मजबूती से बना सकता है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत पहले से ही AI पॉलिसी, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्पेस टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत की यह रफ्तार उसे उन देशों की श्रेणी में ला सकती है जो नए वर्ल्ड ऑर्डर को आकार देने में भूमिका निभाते हैं।

AI global power: दुनिया के सामने दो रास्ते

एडेल नाज़ेरियन ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि इस वक्त दुनिया के सामने दो रास्ते हैं। पहला यह कि देश मिलकर एक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाएं जहां तकनीक का इस्तेमाल इंसानों की भलाई के लिए हो। दूसरा रास्ता यह है कि हर देश अपनी ताकत बढ़ाने की होड़ में लग जाए जिससे वैश्विक तनाव और बढ़े। उनके मुताबिक आने वाले पांच से दस साल यह तय करेंगे कि दुनिया किस दिशा में जाएगी। यह वक्त बेहद संवेदनशील है और हर देश को अपनी विदेश नीति, रक्षा नीति और तकनीकी रणनीति को नए सिरे से सोचना होगा।

निष्कर्ष

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में एडेल नाज़ेरियन की बातों ने यह साफ कर दिया कि दुनिया अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगी। ईरान की जंग एक संकेत है कि बदलाव का दौर शुरू हो चुका है। आने वाले समय में वही देश महाशक्ति बनेगा जो AI, टेक्नोलॉजी और स्मार्ट मिलिट्री स्ट्रैटेजी में सबसे आगे होगा। भारत के लिए यह एक बड़ा मौका है कि वह इस नई विश्व व्यवस्था में एक मजबूत और जिम्मेदार भूमिका निभाए।

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