भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी का नया अध्याय,- 114 राफेल जेट अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनेंगे, मैक्रों बोले- ‘हम पर भरोसा करें
मैक्रों ने पुष्टि की- भारत में बनेगा बड़ा हिस्सा, 114 नए राफेल का ऑर्डर, रक्षा साझेदारी नई ऊंचाई पर
Rafale Jets Make in India: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि राफेल लड़ाकू विमान अब मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में ही बनाए जाएंगे। उन्होंने 114 नए राफेल विमानों के संभावित ऑर्डर की भी पुष्टि की।
Rafale Jets Make in India: 114 राफेल के नए ऑर्डर पर आगे बढ़ रहे दोनों देश
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग अब एक नए और ऐतिहासिक मोड़ पर आ गया है:
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नया ऑर्डर: मैक्रों ने पुष्टि की कि भारत ने हाल ही में 114 नए राफेल विमानों का ऑर्डर देने की इच्छा जताई है।
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रणनीतिक साझेदारी: इस नए ऑर्डर में मेक इन इंडिया मुख्य घटक होगा यानी इन विमानों का एक बड़ा हिस्सा भारत की धरती पर ही बनेगा।
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उद्देश्य: यह केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच औद्योगिक और रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने का अवसर है।
Rafale Jets Make in India: भारत में बनेंगे ज्यादा से ज्यादा घटक
फ्रांस ने इस दिशा में पूरी तरह विश्वसनीय साझेदार होने का भरोसा दिलाया है:
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स्वदेशी उपकरण: राफेल कार्यक्रम में अधिक से अधिक भारतीय घटकों का उपयोग हो और महत्वपूर्ण उपकरण भारत में ही निर्मित हों।
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रक्षा निर्यात लक्ष्य: यह पहल भारत के रक्षा निर्यात लक्ष्य को 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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तकनीकी प्रतिबद्धता: फ्रांस इस पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि उन्नत तकनीक का हस्तांतरण और निर्माण भारत में ही हो।
पनडुब्बी और एयरोस्पेस में भी बढ़ेगा सहयोग
सहयोग का यह मॉडल अन्य बड़े रक्षा क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है:
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पनडुब्बी निर्माण: भारत पहले से ही फ्रांसीसी स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का उपयोग करता है और इस क्षेत्र में अब गहरे तकनीकी सहयोग की संभावनाएं हैं।
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एयरोस्पेस: एयरोस्पेस के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने की बात हुई है, जो रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग के एक नए युग का संकेत है।
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विस्तृत साझेदारी: यह साझेदारी रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक फैली हुई है।
Rafale Jets Make in India: भारत के लिए इस समझौते का महत्व
राफेल विमानों का मेक इन इंडिया के तहत उत्पादन भारत के रक्षा उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा:
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तकनीकी विकास: इससे देश में उन्नत विमानन तकनीक की जानकारी और क्षमता विकसित होगी।
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आर्थिक लाभ: स्थानीय रोजगार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
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आत्मनिर्भरता: रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी निर्भरता धीरे-धीरे कम होगी।
निष्कर्ष: राष्ट्रपति मैक्रों की यह घोषणा उस यात्रा को और तेज करेगी जिसकी ओर भारत पिछले कई वर्षों से बढ़ रहा है। दोनों देश अब मिलकर भविष्य की तकनीकें बनाने के साझेदार हैं।
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