योगी सरकार की बड़ी पहल! गोरखपुर में बन रहा पूर्वी यूपी का पहला वेटरिनरी कॉलेज, 277 करोड़ की लागत से 80 एकड़ में तैयार होगा आधुनिक परिसर

277 करोड़ की लागत से बन रहा कॉलेज जून 2026 तक होगा तैयार, पशुपालकों और छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

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Gorakhpur veterinary college: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक और महत्वाकांक्षी योजना साकार होने जा रही है। गोरखपुर में पूर्वी यूपी का पहला वेटरिनरी कॉलेज जून 2026 के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस कॉलेज से न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार और नेपाल के पशुपालकों को भी सीधा फायदा मिलेगा।

Gorakhpur veterinary college: पूर्वी यूपी को मिलेगी बड़ी सौगात

उत्तर प्रदेश में पशुपालन और पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है। गोरखपुर में निर्माणाधीन पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय यानी वेटरिनरी कॉलेज जून 2026 के अंत तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। यह कॉलेज पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला वेटरिनरी कॉलेज होगा जो इस पूरे इलाके के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा। गोरखपुर और वाराणसी राजमार्ग पर स्थित ताल नदोर में यह कॉलेज बन रहा है। इसका शिलान्यास एवं भूमि पूजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 मार्च 2024 को किया था और निर्माण कार्य 10 सितंबर 2024 को शुरू हुआ था।

Gorakhpur veterinary college: 277 करोड़ की लागत, 80 एकड़ में फैला परिसर

यह वेटरिनरी कॉलेज किसी साधारण शैक्षणिक संस्थान से कहीं अधिक बड़ा और आधुनिक होगा। पूरे 80 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस विशाल परिसर को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण के निर्माण पर ही 277 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह परियोजना कितनी महत्वाकांक्षी है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मनीष कुमार के अनुसार पहले चरण का 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। भवनों के स्ट्रक्चर का काम लगभग संपन्न हो गया है और जून माह के अंत तक संपूर्ण निर्माण कार्य को पूर्ण करा लिया जाएगा।

Gorakhpur veterinary college: छात्रों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

इस वेटरिनरी कॉलेज में जो सुविधाएं दी जाएंगी वे किसी भी बड़े शहर के प्रतिष्ठित संस्थान से कम नहीं होंगी। पहले चरण में एकेडमिक ब्लॉक बनाया जाएगा जो भूतल सहित पांच मंजिला होगा। इसके अलावा एक पूर्ण सुसज्जित हॉस्पिटल ब्लॉक भी होगा जहां पशुओं का इलाज होगा। छात्रों के रहने की व्यवस्था के लिए 106 की क्षमता वाला पुरुष छात्रावास और 106 की क्षमता वाला महिला छात्रावास बनाया जाएगा। पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए भी अलग से 60 की क्षमता वाले पुरुष और महिला छात्रावास की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, कम्युनिटी सेंटर, किसान भवन और पशुओं के रखने के लिए विशेष स्थान भी बनाए जाएंगे।

Gorakhpur veterinary college: नेट जीरो एनर्जी की अवधारणा पर होगा विकास

यह कॉलेज सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पर्यावरण के मामले में भी एक मिसाल बनेगा। पूरे परिसर को नेट जीरो एनर्जी की अवधारणा पर विकसित किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि कॉलेज अपनी बिजली की जरूरत खुद पूरी करेगा। इसके लिए परिसर में सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा। यह कदम न सिर्फ ऊर्जा की बचत करेगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को टिकाऊ विकास का संदेश भी देगा। प्रारंभिक चरण में इस कॉलेज में स्नातक स्तर पर 100 छात्रों के प्रवेश की व्यवस्था होगी। जैसे जैसे अगले चरणों का निर्माण होगा, सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

Gorakhpur veterinary college: योगी ने दिए यूनिवर्सिटी बनाने के संकेत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि पूजन के अवसर पर ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनकी दृष्टि इस कॉलेज को सिर्फ एक महाविद्यालय तक सीमित रखने की नहीं है। उन्होंने कहा था कि भविष्य में इसे विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि आने वाले वर्षों में यह संस्थान पशु चिकित्सा विज्ञान की एक स्वतंत्र यूनिवर्सिटी बन सकती है। फिलहाल यह कॉलेज मथुरा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान से संबद्ध रहेगा।

Gorakhpur veterinary college: पशुपालकों की बदलेगी किस्मत

इस कॉलेज का सबसे बड़ा फायदा उन लाखों पशुपालकों को होगा जो पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और पड़ोसी देश नेपाल में रहते हैं। अब तक इस क्षेत्र में पशु चिकित्सा की कोई बड़ी सुविधा नहीं थी जिससे पशुपालकों को अपने मवेशियों के इलाज के लिए दूर दूर जाना पड़ता था। इस कॉलेज के बनने के बाद यहां अस्पताल में पशुओं का इलाज भी होगा जो किसानों और पशुपालकों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। इसके अलावा यहां पशुओं की नस्ल सुधार के कार्य भी किए जाएंगे जिससे दुग्ध उत्पादन और पशुधन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। मत्स्य पालन यानी फिशरीज से जुड़े कार्यक्रमों को भी इस कॉलेज में आगे बढ़ाया जाएगा।

Gorakhpur veterinary college: राजा शालिहोत्र की विरासत पर आधारित डिजाइन

इस वेटरिनरी कॉलेज की एक खास बात यह भी है कि इसकी ड्राइंग यानी डिजाइन श्रावस्ती के राजा शालिहोत्र की परिकल्पना से प्रेरित है। राजा शालिहोत्र ने तीसरी सदी में शालिहोत्र संहिता की रचना करके पशुधन के क्षेत्र में एक अमूल्य योगदान दिया था। भारतीय परंपरा में उन्हें पशु चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है। इस तरह यह कॉलेज न केवल आधुनिक शिक्षा का केंद्र होगा बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को भी सम्मान देगा।

Gorakhpur veterinary college: युवाओं के लिए नया करियर विकल्प

इस कॉलेज के खुलने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं को पशु चिकित्सक बनने का एक नया और सुलभ मंच मिलेगा। अब तक इस क्षेत्र के छात्रों को वेटरिनरी की पढ़ाई के लिए लखनऊ या मथुरा जैसे दूर के शहरों में जाना पड़ता था जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी चुनौती थी। इस कॉलेज के आने से उन्हें घर के पास ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिल सकेगी। योगी सरकार की यह पहल पूर्वी यूपी के विकास की दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी कदम है जो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएगा।

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