महाराष्ट्र में मुसलमानों का 5% आरक्षण रद्द,- जानें पूरा मामला और इसके मायने
2014 का पुराना GR निरस्त, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले के बाद आया प्रशासनिक आदेश
Maharashtra Muslim Quota Row: महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए वर्ष 2014 में मुस्लिम समुदाय को दिए गए 5 प्रतिशत आरक्षण को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया। सामाजिक न्याय विभाग ने इस संबंध में एक सरकारी प्रस्ताव (Government Resolution – GR) जारी किया, जिसमें 2014 के उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया गया जो शिक्षण संस्थाओं तथा सरकारी एवं अर्ध-सरकारी नौकरियों में मुस्लिम समुदाय को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (SBC-A) की श्रेणी में आरक्षण देता था।
Maharashtra Muslim Quota Row: क्या था यह आरक्षण और कब हुई थी शुरुआत?
यह आरक्षण पहली बार जुलाई 2014 में एक अध्यादेश के जरिए लागू किया गया था।
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घोषणा: तत्कालीन राज्य सरकार ने मुस्लिम समुदाय को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए की श्रेणी में रखते हुए 5 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी।
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न्यायिक रोक: नवंबर 2014 में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने इस आरक्षण पर तत्काल रोक लगा दी।
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अध्यादेश की समाप्ति: राज्य विधानमंडल द्वारा इसे कानून का रूप न दे पाने के कारण निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद अध्यादेश स्वतः समाप्त हो गया।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए इस कोटे को खारिज कर दिया था।
Maharashtra Muslim Quota Row: फिर अब क्यों जारी हुआ नया आदेश?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अध्यादेश की समाप्ति के बावजूद राज्य सरकार ने 2014 में जारी मूल सरकारी प्रस्ताव (GR) को कभी औपचारिक रूप से वापस नहीं लिया था।
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प्रशासनिक भ्रम: वह दस्तावेज़ सरकारी अभिलेखों में मौजूद रहा, जिससे प्रशासनिक भ्रम की संभावना बनी रहती थी।
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शून्य और निरस्त: मंगलवार को जारी नए सरकारी प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि उस पुराने GR से जुड़े सभी निर्णय और पत्राचार अब पूरी तरह शून्य और निरस्त माने जाएंगे।
Maharashtra Muslim Quota Row: नए GR के व्यावहारिक मतलब क्या हैं?
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भर्ती और प्रवेश: अब इस 5 प्रतिशत कोटे के तहत किसी भी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश या सरकारी नौकरी में भर्ती नहीं की जा सकती।
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प्रमाण पत्र: इस श्रेणी के अंतर्गत कोई जाति प्रमाण पत्र या वैधता प्रमाण पत्र भी जारी नहीं होगा।
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कानूनी स्थिति: सरकार ने साफ कर दिया है कि पुराने GR से जुड़ा हर निर्णय और हर पत्र अब कानूनी रूप से अस्तित्वहीन है।
Maharashtra Muslim Quota Row: आरक्षण और संविधान: क्या कहता है कानून?
भारतीय संविधान सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण की सुविधा देता है।
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आधार: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने का आधार सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन होता है, न कि धर्म।
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न्यायिक स्पष्टता: सर्वोच्च न्यायालय यह स्पष्ट कर चुका है कि आरक्षण का आधार धर्म नहीं हो सकता। इसी कारण यह प्रावधान न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं पाया।
Maharashtra Muslim Quota Row: आगे क्या होगा?
इस नए GR से प्रशासनिक स्तर पर लगा हुआ अधूरापन अब दूर कर दिया गया है। सरकारी अभिलेखों में अब कोई ऐसा दस्तावेज़ नहीं रहेगा जो किसी भ्रम या विवाद को जन्म दे सके। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के विभिन्न संगठनों की ओर से समाज के पिछड़े तबकों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग संवैधानिक ढांचे के भीतर एक चुनौती बनी रहेगी।
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