12वीं पास ट्रेडर लाया PIL और CJI भड़क गए! कोर्ट में ही अंग्रेजी परीक्षा की दी चेतावनी, ‘स्वेटर बेचो, PIL मत करो’

12वीं पास ट्रेडर की PIL पर CJI सूर्यकांत भड़के "अंग्रेजी परीक्षा लूंगा कोर्ट में", AI और टाइपिस्ट का खुलासा, "स्वेटर बेचो, PIL छोड़ो" की नसीहत

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CJI Suryakant: सुप्रीम कोर्ट में हर रोज सैकड़ों याचिकाएं दायर होती हैं। इनमें से कुछ याचिकाएं जनहित में होती हैं जो देश की व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं, लेकिन कुछ याचिकाएं ऐसी भी होती हैं जो न केवल बेतुकी होती हैं बल्कि अदालत का कीमती समय भी बर्बाद करती हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला जो इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर कानूनी हलकों तक चर्चा का विषय बन गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI सूर्यकांत एक PIL की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पर इस कदर भड़क गए कि उन्होंने कोर्ट में ही अंग्रेजी की परीक्षा आयोजित कराने की बात कह डाली। उनका वह जवाब सुनकर पूरी अदालत में सन्नाटा छा गया।

CJI Suryakant: क्या था पूरा मामला

सुनवाई की शुरुआत तब हुई जब एक PIL पर सुनवाई के लिए मामला CJI सूर्यकांत की पीठ के सामने आया। याचिका देखने में काफी जटिल और कानूनी भाषा से भरी हुई थी। उसमें कॉर्पोरेट डोनर्स, फिड्यूशरी रिस्क और संवैधानिक सिद्धांतों जैसे भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन जब CJI ने याचिकाकर्ता से इस बारे में सवाल करना शुरू किया तो असली तस्वीर सामने आने लगी। CJI ने सबसे पहले याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्होंने यह याचिका खुद तैयार की है। याचिकाकर्ता ने हां कहा और अपना फोन जमा करने तक की पेशकश की। इसके बाद CJI ने उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में जानना चाहा। याचिकाकर्ता ने बताया कि वे केवल 12वीं पास हैं और उन्होंने लुधियाना के सनातन धर्म स्कूल से पढ़ाई की है।

CJI Suryakant: CJI ने कहा, यहीं कोर्ट में लूंगा अंग्रेजी की परीक्षा

12वीं पास का जवाब सुनते ही CJI सूर्यकांत ने एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरी अदालत को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि वे कोर्ट में ही एक अंग्रेजी परीक्षा आयोजित करेंगे और अगर याचिकाकर्ता के 30 अंक आ जाते हैं तो वे उनकी याचिका पर विचार करेंगे। इस पर याचिकाकर्ता ने आत्मविश्वास के साथ हां कह दिया। लेकिन CJI का असली सवाल तो याचिका में लिखी जटिल कानूनी भाषा को लेकर था। उन्होंने पूछा कि याचिका में जो फिड्यूशरी रिस्क जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं उनका क्या अर्थ है। CJI का इशारा साफ था कि एक 12वीं पास व्यक्ति इस तरह की जटिल कानूनी शब्दावली का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हो सकता।

CJI Suryakant: AI टूल और टाइपिस्ट का खुलासा, कोर्ट में हुई फजीहत

जब CJI ने यह जानना चाहा कि असल में इस याचिका का मसौदा किसने तैयार किया तो जो जवाब सामने आया वह और भी चौंकाने वाला था। वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने AI टूल्स की मदद से इसे खोजा और तैयार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि एक टाइपिस्ट ने इस याचिका को टाइप किया था जिसे उन्होंने चार जैकेट उपहार में दी थीं और टाइपिस्ट ने इस काम के लिए एक हजार रुपये प्रति घंटे का शुल्क भी लिया था। यह सुनते ही CJI सूर्यकांत ने तुरंत आदेश दिया कि उस टाइपिस्ट को अदालत में हाजिर किया जाए। CJI का यह कदम इस बात की ओर इशारा करता था कि सुप्रीम कोर्ट के टाइपिस्ट का कथित रूप से इस तरह के मामलों में शामिल होना एक गंभीर मसला है।

CJI Suryakant: CJI ने कहा, किसी और ने दिया है ‘कंधा’

पूरी सुनवाई के दौरान जो तस्वीर सामने आई उसके आधार पर CJI सूर्यकांत ने अपनी राय सुनाई। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता ने किसी ऐसे व्यक्ति को अपना कंधा दिया है जिसने असल में इस गोलमोल और बेतुकी याचिका का मसौदा तैयार किया। CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस तरह के संवैधानिक सिद्धांतों को उठाने की कोशिश इस याचिका में की गई है वह उस याचिकाकर्ता की सोच नहीं हो सकती जो एक छोटा-मोटा व्यापारी है। यह टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन लोगों की ओर इशारा होता है जो दूसरों के नाम पर याचिकाएं दायर करते हैं और अपने निहित स्वार्थों को साधने की कोशिश करते हैं।

CJI Suryakant: ‘स्वेटर बेचो, PIL छोड़ो’, CJI की अनोखी नसीहत

सुनवाई के अंत में CJI सूर्यकांत ने जो कहा वह इस पूरे मामले का सबसे यादगार हिस्सा बन गया। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि वे जाकर कुछ और स्वेटर बनाकर बेचें और अगर इस तरह की फालतू PIL करते रहे तो उन्हें कोर्ट का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यह बयान एक तरफ हास्यास्पद लग सकता है लेकिन इसमें एक गंभीर संदेश भी छुपा है। CJI ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि अदालत ऐसी निरर्थक याचिकाओं के लिए बार-बार जांच का आदेश नहीं देती, लेकिन साथ ही उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की याचिका दायर करने की हिम्मत नहीं होनी चाहिए।

CJI Suryakant: PIL का दुरुपयोग एक गंभीर समस्या

यह मामला एक बड़े मुद्दे की ओर ध्यान दिलाता है। जनहित याचिका यानी PIL भारत के न्यायिक इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि है जो आम नागरिकों को सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का हक देती है। इसके जरिए देश में कई ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं। लेकिन जब इसी व्यवस्था का दुरुपयोग बेतुकी और निरर्थक याचिकाओं के लिए किया जाता है तो अदालत का बहुमूल्य समय और संसाधन बर्बाद होते हैं। CJI सूर्यकांत का यह रवैया इस बात का संकेत है कि सुप्रीम कोर्ट अब ऐसी याचिकाओं के प्रति सख्त रुख अपना रहा है। न्याय की यह सर्वोच्च अदालत चाहती है कि उसके सामने आने वाले मामले वास्तविक जनहित से जुड़े हों न कि किसी के निजी एजेंडे या अज्ञानता की उपज।

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