IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला,- हरियाणा सरकार के खाते में हेराफेरी, 4 कर्मचारी निलंबित
हरियाणा सरकार के खाते में हेराफेरी, 4 कर्मचारी निलंबित, पुलिस में शिकायत, फॉरेंसिक जांच शुरू
IDFC First Bank Fraud: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में एक बड़ा बैंकिंग घोटाला सामने आया है। बैंक की चंडीगढ़ शाखा में कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों से करीब 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। बैंक ने स्वयं इस गंभीर मामले की जानकारी शेयर बाजार और अधिकारियों को दी है।
IDFC First Bank Fraud: चार कर्मचारी निलंबित, जांच जारी
इस गंभीर धोखाधड़ी के मामले में बैंक ने तत्काल निम्नलिखित कार्रवाई की है:
-
निलंबन: चार संदिग्ध कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।
-
कानूनी कार्रवाई: बैंक ने शेयर बाजार को बताया कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, दीवानी और आपराधिक कार्रवाई करेगा।
-
पुलिस शिकायत: मामले की औपचारिक शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी गई है और बैंक जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है।
IDFC First Bank Fraud: कैसे पकड़ में आया घोटाला
यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब हरियाणा सरकार ने एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अपना खाता बंद करने का अनुरोध किया:
-
संपर्क: 18 फरवरी 2026 से हरियाणा सरकार के कुछ विभागों ने बैंक से अपने खातों के बारे में संपर्क करना शुरू किया।
-
विसंगति: खाता बंद करने और पैसा ट्रांसफर करने की प्रक्रिया के दौरान बैंक को वास्तव में जमा राशि और रिकॉर्ड में बताई गई राशि के बीच भारी अंतर दिखाई दिया।
-
खुलासा: सरकारी रिकॉर्ड और बैंक सिस्टम की जांच के बाद 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ।
IDFC First Bank Fraud: बैंक द्वारा उठाए गए सुरक्षात्मक कदम
घोटाले का पता चलते ही बैंक ने रिकवरी के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं:
-
फ्रीज करने का अनुरोध: बैंक ने कुछ लाभार्थी बैंकों से उन खातों में जमा रकम को तुरंत फ्रीज करने का अनुरोध किया है, जिनमें संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
-
फॉरेंसिक जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फॉरेंसिक जांच करवाने का निर्णय लिया गया है।
IDFC First Bank Fraud: सीमित दायरा और ग्राहकों को आश्वासन
बैंक ने आम ग्राहकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए स्पष्ट किया है:
-
प्रभावित क्षेत्र: यह धोखाधड़ी सिर्फ चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खास खातों तक ही सीमित है।
-
अन्य ग्राहकों पर असर: इसका असर बैंक के अन्य ग्राहकों या अन्य शाखाओं पर नहीं पड़ेगा।
IDFC First Bank Fraud: व्यापक निहितार्थ
यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में आंतरिक नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल उठाता है:
-
आंतरिक लेखा परीक्षा (Internal Audit) में कमी।
-
दोहरी जांच प्रणाली का काम न करना।
-
सरकारी खातों की विशेष निगरानी का अभाव।
-
कर्मचारियों पर अपर्याप्त नियंत्रण।
निष्कर्ष: बैंक इस मामले की गहराई से जांच करवा रहा है ताकि सरकारी पैसों की अधिकतम रिकवरी की जा सके। जांच के नतीजे सामने आने पर ही घोटाले का पूरा तंत्र और दोषियों की स्थिति स्पष्ट होगी।
read more here